NCERT Solutions 5th EVS Chapter 1-कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को?

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अध्याय1 कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को?

Lesson 1- Kaise Pahachana Chinti Ne Dost Ko

NCERT Solutions 5th EVS Chapter 1-कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को?

NCERT CBSE Solutions 5th EVS Chapter 1-

Kaise Pahachana Chinti Ne Dost Ko (कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को?)

यह सामग्री संदर्भ के लिए है। आप अपने विवेक से प्रयोग करें।

 

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प्रश्न 1 क्या तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है ?
चील आकर फुर्ती से तुम्हारी रोटी ले गई।

सोए हुए कुत्ते के पास से गुज़रे और झट से उसके कान खड़े हो गए।

कुछ मीठा ज़मीन पर गिरा और वहाँ चींटियों का झुंड इकट्ठा हो गया ।

क्यों होता है ऐसा सोच कर बताओ

उत्तर 1- हाँ, मेरे साथ भी ऐसा हुआ है। जानवरों में भी देखने, सुनने, सूँघने और महसूस करने की शक्ति होती है। कई जानवर मीलों दूर से अपना शिकार पहचान लेते हैं। हल्की से हल्की आहट भी सुन लेते हैं। कुछ जानवर सूँघ कर अपने साथियों तथा चीजों को पहचान लेते हैं। इसलिए ऐसा होता है।

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सोचो और बताओ

प्रश्न  इस चींटी को कैसे पता चला कि सामने वाली चींटियाँ दूसरी टोली की है?

उत्तर -चींटी चलते हुए अपने पीछे एक खास किस्म की गंध (फेरोमोंनस) छोड़ती है। इसी गंध के कारण चींटी को पता चला कि सामने से आने वाली चींटियां दूसरी टोली की है।

प्रश्न  पहरेदार चींटी ने इस चींटी को कैसे पहचाना?

उत्तर- पहरेदार चींटी ने इस चींटी को उसकी विशेष गंध से पहचाना।

करके देखो और लिखो

चीनी के कुछ दाने गुड या कोई मीठी चीज़ ज़मीन पर र। अब इंतजार करो, चींटियों के आने का। अब देखो-
चींटी कितनी देर में आई?

उत्तर- कुछ ही देर में वहां चींटियों का पूरा दल इकट्ठा हो गया।

क्या सबसे पहले एक चींटी आई या सारा झुंड इकट्ठा आया?

उत्तर- सबसे पहले एक-दो चींटियां आई। थोड़ी देर में पूरा झुंड ही वहां पहुंच गया।

चीटियां खाने की चीज़ का क्या करती हैं?

उत्तर- चींटियां खाने की चीज़ों को अपने आवास पर एकत्र करती हैं। बाद मे उनका पूरा दल इस्तेमाल करता है।

वे उस जगह से कहां जाती हैं?

उत्तर- वे उस जगह से अपने आवास/ बिल मैं जाती हैं।

क्या वे एक-दूसरे के पीछे कतार में चलती हैं ?

उत्तर- हाँ, वे एक-दूसरे के पीछे कतार में चलती है।

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प्रश्न- अब ध्यान से, बिना किसी चींटी को नुकसान पहुँचाए, उस कतार के बीच में पेंसिल से कुछ देर चींटियों का रास्ता रोको। देखो, अब चींटियां कैसे चलती हैं?

उत्तर- पेंसिल से चींटियों का रास्ता रोकने पर कुछ चींटियां कतार छोड़ कर यहां -वहां भटकने लगी और कुछ पेंसिल के ऊपर से जाने लगी।

प्रश्न- क्या अब बता सकते हो, जब तुमने पेंसिल से चींटियों का रास्ता रोका, तब उनके ऐसे व्यवहार का क्या कारण था?

उत्तर- जब चींटियों का रास्ता पेंसिल से रोक दिया गया तो उन्हें गंध पहचानने में मुश्किल हुई । जिस वजह से कुछ चींटियां यहां-वहां भटकने लगी। थोड़ी कोशिश के बाद कुछ चींटियों ने पेंसिल के ऊपर से जाना शुरू किया।

प्रश्न- क्या तुम कभी मच्छरों से परेशान हुए हो? सोचो उन्हें कैसे पता चलता होगा कि तुम कहाँ हो?

उत्तर- हाँ, मच्छर तो अक्सर मुझे परेशान करते हैं। वे मेरे शरीर की गंध और गर्मी से मुझे ढूंढ लेते हैं।

प्रश्न- क्या तुमने कभी किसी कुत्ते को इधर-उधर कुछ सूँघते हुए देखा है? सोचो, कुत्ता क्या सूँघता होगा?

उत्तर- कुत्तों ने अपने इलाके बांटे होते हैं। वे दूसरे कुत्ते को अपने इलाके में नहीं आने देते। वे इधर-उधर सूँघ कर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि कोई दूसरा कुत्ता उनके इलाके में तो नहीं आया है। दूसरी जगह जाने पर वह सूँघ कर यह पता लगा लेते हैं कि क्या वहाँ कोई दूसरा कुत्ता रहता है?

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प्रश्न- हम कुत्तों के सूंघने की शक्ति का इस्तेमाल कहां-कहां करते हैं?

उत्तर- हम कुत्तों के सूंघने की शक्ति का इस्तेमाल खोया हुआ सामान/ व्यक्ति ढूंढने, चोरों को पकड़ने, विस्फोटक सामग्री/ बम ढूंढने के लिए करते हैं।

प्रश्न- किन किन मौकों पर तुम्हारी सूंघने की शक्ति तुम्हारे काम आती है? सूची बनाओ। उदाहरण के लिए- खाने की गंध से उसके खराब होने का पता चलना, किसी चीज़ के जलने का पता चलना ।

उत्तर- सूंघने की शक्ति से खाने की चीज़ों में फर्क कर सकती हूं। फूलों की सुगंध, इत्र की सुगंध, कूड़े-करकट की बदबू, और रसोई घर में गैस के रिसाव की बदबू भी पहचान सकती हूं। सूंघने की शक्ति से बिना देखे आसपास के वातावरण की स्वच्छता का आभास हो जाता है।

प्रश्न- तुम बिना देखे किन जानवरों को गंद से पहचान सकते हो? उनके नाम लिखो।

उत्तर- मैं बिना देखे बिल्ली, कुत्ता, मुर्गी, बकरी और घोड़े को पहचान सकती हूँ।

प्रश्न- किन्हीं पांच ऐसी चीज़ों के नाम लिखो, जिनकी गंध तुम्हें अच्छी लगती है । और किन्ही पांच ऐसी चीज़ों के नाम भी लिखो जिनकी गंध तुम्हें अच्छी नहीं लगती।

उत्तर- इनकी गंध अच्छी लगती है- भोजन, इत्र, धूप-अगरबत्ती, फूल, फल, मिट्टी आदि।

इन की गंध अच्छी नहीं लगती- सड़ा भोजन, कचरा, शौच, गाड़ियों का धुआं, गोबर, मृत जानवर आदि।

प्रश्न- क्या तुम्हारे साथियों के उत्तर एक-से हैं?

उत्तर- उत्तर में कुछ चीज़े एक सी हैं कुछ अलग-अलग हैं।

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चर्चा करो

प्रश्न- क्या तुम्हें अपने घर के लोगों के कपड़ों से गंध आती है? किसके?

उत्तर- हां, कई बार घर के लोगों के कपड़ों के साथ-साथ मेरे कपड़ों से भी गंध आती है। जब हम कोई मेहनत का काम करते हैं, धूप में काफी देर तक पैदल चलते हैं तो हमें पसीना आता है। पसीने की गंध कपड़ों में महसूस की जा सकती है। जब घर के लोग खेतों से काम करके आते हैं तो उनके कपड़ों से पसीने और मिट्टी की गंध आती है। पालतू पशुओं के साथ काम करने के बाद भी कपड़ों में उनकी गंद महसूस होती है।

प्रश्न- कभी किसी भीड़ से भरी जगह जैसे मेले में, बस में, ट्रेन आदि में तुम्हें गंध का एहसास हुआ है। बताओ कैसा लगा?

उत्तर- हां, मुझे बस में गंध का एहसास हुआ है। बस मैं ईंधन जलने की गंध आती है। कई बार लोग बस में बैठ कर कुछ खाने लगते हैं उसकी खुशबू भी आती है। कुछ लोगों को बस में उल्टी हो जाती है जिसके कारण दुर्गंध सारी बस में फैल जाती है। कई बार इस दुर्गंध के कारण मुझे भी उल्टी आने लगती है।

सोचो और चर्चा करो

प्रश्न- सुशीला ने अपनी बेटी की पौटीसाफ करते समय तो मुंह नहीं ढका लेकिन दीपक की ‘पौटी’ साफ़ करते समय उसने मुँह ढक लिया । ऐसा क्यों ?

उत्तर- जब सुशीला जी अपनी बेटी की ‘पौटी’साफ कर रही थीं तो उनका ध्यान अपनी बेटी की सफाई पर था न कि बदबू पर। वह अपनी बेटी की पौटी को गंदगी नहीं मान रही थी। लेकिन दीपक की पौटी साफ करते हुए गंदगी का विचार मन में आया होगा। इसलिए उन्होंने अपने मुँह को ढक लिया। अक्सर हमें गंध तब ज्यादा परेशान करती है जब हमारा मन उसको गंदा मानने लगता है। अगर मन बना ले तू वह गंद इतना परेशान नहीं करती।

प्रश्न- जब तुम कूड़े के ढेर के पास से गुजरते हो, वहां की गंध तुम्हें कैसी लगती है? उस बच्चे के बारे में सोचो जो दिन में कई घंटे इसी कचरे के ढेर में से चीज़ें बीनता है ।

उत्तर- दुर्गंध के कारण कूड़े के ढेर के पास से गुज़रना बहुत मुश्किल लगता है । वहाँ से जल्दी -जल्दी दूर जाने का मन करता है । जो बच्चा कूड़े के ढेर में से चीज़ें बीनता है वह मन बना लेता है कि उसे इस दुर्गंध से कुछ नहीं लेना। वह कूड़े को गंदगी नहीं मानता क्योंकि इसमें से ही उसे काम की चीज़ें बीनानी है । इसके साथ ही जब हम बहुत देर एक ही गंध सूँघते रहते हैं तो वह गंध महसूस होनी बंद हो जाती है। लेकिन फिर भी बच्चे का इस प्रकार कूड़े के ढेर में बने रहना उसके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। उसका यह समय तो स्कूल के लिए है।

प्रश्न- क्या गंध का अच्छा या बुरा होना एक जैसा ही होता है या इस पर हमारी सोच का असर भी पड़ता है?

उत्तर- गंध का अच्छा या बुरा होना एक जैसा नहीं होता यह हमारी सोच पर निर्भर करता है। एक ही गंध किसी को अच्छी लगती है तू किसी को बुरी। गंध का अच्छा या बुरा होना हमारी पसंद और नापसंद पर निर्भर करता है।

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कैसे दिखा

प्रश्न- किसी ऐसे पक्षी का नाम लिखो जिसकी आँखें सामने की तरफ होती हैं?

उत्त- उल्लू की आँखें सामने की तरफ होती हैं।

प्रश्न- ऐसे कुछ पक्षियों के नाम लिखो जिनकी आँखें सिर के दोनों तरफ होती हैं। इन पक्षियों की आँखें का आकार उनके सिर की तुलना में कैसा होता है ?

उत्तर- कौआ, कबूतर, मोर, बतख़,गौरेया, बटेर, हंस, गिद्ध, कोयल, कठफोड़वा, चिड़िया, चील, मुर्गी, चकता, अबाबील, मैना, बुलबुल, सारस, तीतर, तोता, मुर्गा आदि पक्षियों की आँखें सिर के दोनों तरफ होती है। पक्षियों की आँखों का आकार उनके सिर की तुलना में बड़ा होता है। बड़ी आँखें साफ देखने में मदद करती हैं । उड़ते हुए टकराने से बचाती हैं, दूर से शिकार को पहचानने और पकड़ने मैं मदद करती हैं।

तुम भी अलग-अलग तरीकों से देखो

प्रश्न- तुम अपनी दाईं आँख बंद करो या हाथ से ढको। उसी समय तुम्हारा साथी तुम्हारे बिल्कुल दाईं तरफ थोड़ी दूर खड़ा होकर कुछ एक्शन करें।
  • क्या तुम बिना गर्दन घुमाए अपने साथी के एक्शन को देख पाते हो?
  • अब दोनों आँखें खोल कर बिना गर्दन घुमाए दाईं तरफ खड़े साथी के एक्शन को देखो।
  • दोनों तरीकों से देखने पर क्या अंतर पाया ?

उत्तर- दाईं आँख बंद करके बिना गर्दन घुमाए साथी का एक्शन नहीं दिखा। दोनों आँखें खोल कर बिना गर्दन घुमाए एक्शन दिखाई दिया। दोनों आंखें खुली होने पर देखने का दायरा बढ़ जाता है इसलिए सामने देखते हुए भी दाईं और बाँई और दिखता रहता है।

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प्रश्न- अब गेंद या छोटा सिक्का उछाल कर पकड़ने का खेल खेलो। एक बार दोनों आँखें खोल कर और एक बार एक आँख बंद करके। किस स्थिति में उसे पकड़ना आसान लगा।

उत्तर- जब मैंने गेंद को उछाला तो दोनों आँखें खोल कर उसे पकड़ना आसान लगा। लेकिन एक आँख बंद करके उसे पकड़ने में थोड़ी सी मुश्किल आई।

प्रश्न- सोचो, अगर पक्षियों की तरह तुम्हारी आँखें तुम्हारे कान की जगह होतीं तो कैसा होता? तुम ऐसे क्या-क्या काम कर पाते, जो अभी नहीं कर पाते हो?

उत्तर- अगर पक्षियों की तरह मेरी आँखें कान की जगह होतीं तो मैं बिना गर्दन घुमाए दाईं और बाईं तरफ आसानी से देख सकती। मेरे देखने का दायरा बहुत बड़ा होता।

प्रश्न- क्या तुम सोच सकते हो, ज़मीन पर पड़ी हुई एक रोटी किसी चील को कितनी दूर से दिखाई दे जाती होगी?

उत्तर- चील को ज़मीन पर पड़ी हुई रोटी लगभग दो किलोमीटर से दिखा देती है।

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लिखो

प्रश्न- दस जानवरों के नाम लिखो जिनके कान दिखते हैं।

उत्तर- गाय, भैंस, बैल, बकरी, कुत्ता, बिल्ली, हाथी, खरगोश, शेर, हिरण, बंदर, लंगूर, भेड़, भालू आदि।

प्रश्न- कुछ जानवरों के नाम लिखो, जिनके बाहरी कान हमारे बाहरी कानों से बड़े होते हैं।

उत्तर- गाय, भैंस, बेल, बकरी, कुत्ता, गधा, हाथी, खरगोश आदि के कान हमारे बाहरी कानों से बड़े होते हैं।

सोचो

प्रश्न- तुम्हें क्या लगता है, क्या जानवरों के कान के आकार और उनके सुनने की शक्ति में कुछ संबंध होता है?

उत्तर- जानवरों के कान के आकार और उनके सुनने की शक्ति में संबंध होता है। लेकिन कान की सही बनावट भी महत्व रखती है। अधिक बड़े बाहरी कान आवाजों को ठीक ढंग से कान के अंदर ले जाते हैं। जिससे सही और साफ़ सुनाई देता है। जानवरों के बड़े कान उन्हें ठंडा रखने में भी मदद करते हैं।

करके देखो

प्रश्न- स्कूल में कोई शांत जगह ढूंढो। वहाँ एक बच्चा बाकी बच्चों से थोड़ी दूर खड़ा होकर धीरे से कुछ बोले। बाकी बच्चे उसे ध्यान से सुनें। वही बच्चा फिर से उतनी ही धीरे बोले। इस बार बाकी बच्चे अपने कानों के पीछे हाथ रख कर सुने। किस बार आवाज ज्यादा साफ़ सुनाई दी अपने साथियों से भी पता करो।

उत्तर- कानों के पीछे हाथ रखने पर साफ़ सुनाई दिया । हाथों के कारण कान का बाहरी हिस्सा बड़ा हो गया था। जिससे आवाजें अच्छी तरह से कान के अंदर जा पा रही थी। यही कारण था कि हमें साफ़ और स्पष्ट सुनाई दिया।

प्रश्न- तुम अपने कानों पर हाथ रख कर कुछ बोलो। अपनी ही आवाज सुनाई देती है ना ?

उत्तर- कानों पर हाथ रख बोलने पर मुझे अपनी आवाज़ सुनाई दी। हम जैसे बाहरी कानों की मदद से सुनते हैं, वैसे ही कुछ आवाजें शरीर में अंदर की तरफ से भी हमारे अंदरूनी कान तक पहुंचती है। जिससे मैं कान बंद करके भी अपनी आवाज़ सुन सकती हूँ ।

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प्रश्न- एक बार डेस्क को बजाओ। कैसी आवाज़ आती है ? अब जैसे चित्र में दिखाया है वैसे ही डेस्क पर कान लगाओ ।एक बार फिर अपने हाथ से डेस्क बजाओ। कैसी आवाज़ आती है ? क्या दोनों आवाज़ों में कुछ अंतर है ?

उत्तर- पहली बार आवाज़ वैसीे ही सुनाई दी जैसी मुझे और आवाज़ें सुनाई देती हैं। लेकिन डेस्क पर कान लगाने पर आवाज़ कंपन के साथ थोड़ी स्पष्ट सुनाई दी। सांप के भी बाहरी कान नहीं होते वह भी इसी प्रकार जमीन पर हुए कंपन को सुन लेता है।

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प्रश्न- क्या तुम कुछ जानवरों की आवाज़ें समझ सकते हो? किस-किस की?

उत्तर- हमें कुछ जानवरों की आवाज़ें समझ में आ जाती हैं। जैसे- कुत्ते को चोट लगने पर, बिल्लियों के लड़ने की आवाज़, पालतू पशुओं के आपस में लड़ने की, ख़तरा नज़दीक होने पर चिड़ियों की, आदि।

प्रश्न- क्या कुछ जानवर तुम्हारी भाषा भी समझ सकते हैं? कौन कौन से?

उत्तर- हाँ, कुछ जानवर हमारी थोड़ी-थोड़ी भाषा समझ लेते हैं। जैसे– कुत्ता, बिल्ली, अन्य पालतू पशु बुलाने पर आ जाते हैं। कुत्ता, बिल्ली कई बार डाँटने पर चुपचाप मुंह फेर कर बैठ जाते हैं या भाग जाते हैं। किसान खेतों में बैलों को बोल-बोल कर हल चलाते हैं। वे उनकी बात समझ रहे होते हैं।

कितना सोएँ

प्रश्न- तुमने कभी ध्यान दिया है कि सर्दियों के दिनों में अचानक ही छिपकलियों कहीं गुम हो जाती हैं प्रोग्राम सोचो, वे ऐसा क्यों करती होंगी?

उत्तर- हाँ, सर्दियों में छिपकलियाँ नज़र ही नहीं आती । इस समय वे शीत निद्रा (गहरी नींद) में चली जाती हैं। सर्दियों में उन्हें भोजन कम मिल पाता है और वे अपने शरीर को गर्म भी नहीं रख पाती हैं। अपनी ऊर्जा बचाने और जीवित रहने के लिए वे शीत निद्रा में चली जाती हैं।

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प्रश्न- बताओ, छिपकली के लिए सर्दियों में यह घड़ी कैसी दिखेगी?

उत्तर- पूरी घड़ी छायांकित होगी। क्योंकि वह सर्दियों में शीत निद्रा में रहती है।

प्रश्न- चित्रों में कुछ जानवरों के सोने के समय को दिखाया गया है। हर चित्र के नीचे लिखो कि वह जानवर एक दिन में कितने घंटे सोता है?

उत्तर- गाय- 4 घंटे, अजगर-18 घंटे, जिराफ- 2 घंटे, बिल्ली- 12 घंटे

प्रश्न- अपने आस-पास किसी जानवर को देखकर क्या तुम्हारे मन में कुछ प्रश्न उठते हैं? कौन-से? कोई दस प्रश्न बनाओ और लिखो।

उत्तर- अपने आसपास जानवरों को देखकर मन में प्रश्न उठते हैं कि-

  1. उनको क्या करना अच्छा लगता होगा?
  2. वे किस बात से नाराज़ होते होंगे?
  3. क्या वे सपने देखते होंगे?
  4. क्या वे मुझे अच्छा इंसान मानते होंगे?
  5. जब समय पर खाना-पीना नहीं होता तब वे क्या सोचते होंगे?
  6. क्या उनमें आपस में दोस्ती होती होगी?
  7. क्या वे मुझसे बात करना चाहते होंगे?
  8. वे खतरों को कैसे भाँपते होंगे?
  9. क्या वह भी अपना पक्का घर बनाना चाहते होंगे?
  10. वे एक -दूसरे को कैसे मनाते होंगे?
  11. वे किस चीज़ से सबसे ज्यादा डरते होंगे?
  12. अपने घर का रास्ता कैसे याद रखते होंगे?
  13. पालतू पशु अपने मालिक पहचान कैसे करते होंगे?
  14. उन्हें भूकंप आने का एहसास कैसे होता होगा?
  15. कुछ जानवर बिना सीखे पानी में कैसे तैरते होंगे?

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प्रश्न- सोचो, जंगल में बाघ को किन चीज़ों से खतरा होगा?

उत्तर- जंगल में निम्न चीज़ों /कारणों से खतरा है:-

  1. जंगलों का कम होना जिससे इन के रहने की जगह कम हो गई।
  2. बाघों का शिकार करना।
  3. विश्व का तापमान बढ़ने से।
  4. बाघों की ज़रूरत को न समझ पाने से।
  5. बाघों के क्षेत्र के नज़दीक रिहायशी इलाके बस जाने से।
  6. बीमारी फैलने से।
  7. बाघ को बचाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रही हैं।
प्रश्न- क्या हम भी जानवरों के लिए खतरा बन रहे हैं? कैसे?

उत्तर- हम इंसान, घर, खेत, शहर, कारखाने, सड़कें, लकड़ी, के लिए जंगलों को काट रहे हैं। जानवरों को उनके दांतों, सींग, खाल, मास, हड्डियों के लिए मार रहे हैं। कई बार तो सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए भी इन्हें मार दिया जाता है। और कुछ हम इतना प्रदूषण फैला रहे हैं कि उससे ये अपने आप ही कम होने लगे हैं। इस प्रकार हम मनुष्य इन जानवरों के लिए खतरा बन रहे हैं।

पता करो

प्रश्न- भारत में जानवरों की सुरक्षा के लिए ऐसे नेशनल पार्क और कहां-कहां है? इनके बारे में जानकारी इकट्ठा करके रिपोर्ट तैयार करो ।

उत्तर:

क्र. सं.  राज्य  
राष्ट्रीय उद्यान/अभ्यारण्य
प्रमुख वन्यजीव /प्राणी
1 हजारीबाग वन्य जीव अभ्यारण्य झारखंड चीता, भालू, तेंदुआ, चीतल, सांभर, जंगली सूअर
2 कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य बिहार बाघ, नीलगाय, घड़ियाल, सांभर, जंगली सूअर
3 गिर राष्ट्रीय उद्यान गुजरात शेर, सांभर, तेंदुआ, जंगली सूअर
4 जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड हाथी, बाघ, चीता, हिरण, भालू, नीलगाय, सांभर, जंगली सूअर
5 चन्द्रप्रभा अभ्यारण्य उत्तर प्रदेश चीता, भालू, नीलगाय, तेंदुआ, सांभर
6 बन्दीपुर राष्ट्रीय उद्यान कर्नाटक हाथी, चीता, तेंदुआ, हिरण, चीतल, सांभर,
7 पाखाल वन्य जीव अभ्यारण्य आंध्र प्रदेश चीता, तेंदुआ, सांभर, भालू, जंगली सूअर
8 काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम चीता, एक सींग वाला गेंडा, हुन्गली सूअर, भैंसा
9 कुंभलगढ़ अभ्यारण्य राजस्थान चीता, नीलगाय, सांभर, भालू, नीलगाय
10 पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश चीता, नीलगाय, सांभर, भालू, जंगली सूअर
11 वोरिविली राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र लंगूर, हिरण, सांभर, तेंदुआ, जंगली सूअर
12 अबोहर अभ्यारण्य पंजाब जंगली सूअर, हिरण, नीलगाय, काला हंस, कबूतर
13 चिक्ला अभ्यारण्य ओडिशा क्रेन, जलकौवा, पेलिवन,प्रवासी पक्षी
14 इंदिरा गांधी अभ्यारण्य तमिलनाडु हाथी, बाघ, चीतल, तेंदुआ, सांभर, रीछ, जंगली कुत्ता, लंगूर
15 पेरियार अभ्यारण्य केरल चीता, हाथी, तेंदुआ, सांभर, हिरण, भालू, नीलगाय, जंगली सूअर
16 कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, सांभर, बारहसिंघा
17 किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान जम्मू-कश्मीर काला हिरण, जंगली याक, तिब्बती गधा
18 सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल बाघ, चीता, हिरण, मगरमच्छ

हम क्या समझे

प्रश्न- क्या तुमने कभी ध्यान दिया है, बहुत से गायक-गायिकाएँ गाते समय अपने कान पर हाथ रखते हैं? वे ऐसा क्यों करते होंगे?

उत्तर: कान पर हाथ रख कर इसलिए गाते हैं ताकि वे अपनी आवाज़ को बिल्कुल साफ सुनते हुए सही सुर लगा सके और बाहर से आने वाली आवाज़ें बाधा न बने।

प्रश्न- कुछ उदाहरण देकर समझाओ जिससे हमें पता चलता है कि जानवरों की देखने, सुनने, सूँघने और महसूस करने की शक्ति बहुत तेज़ होती है।

उत्तर- उल्लू, चमगादड़ रात को भी देख पाते हैं। शिकारी पक्षी जैसे चील, बाज़ बहुत दूर से ही अपने शिकार को पहचान लेते हैं। कुत्ता अपने शिकार को बहुत दूर से ही सूँघ कर पहचान लेता हैं । कुत्ता, बिल्ली, की सुनने की शक्ति हमसे बहुत ज्यादा होती है। हल्की सी आहट पर भी चौकन्ना हो जाते हैं।

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