NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-जहाँ चाह वहाँ राह

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अध्याय 5 जहाँ चाह वहाँ राह

lesson-5 Jahan chah wahan raah

कक्षा 5 हिन्दी | रिमझिम

NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-जहाँ चाह वहाँ राह (Jahan chah wahan raah) यह सामग्री सिर्फ संदर्भ के लिए है। आप अपने विवेक से तथा  अपने अनुसार प्रयोग करें।विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है । पुस्तक में चर्चा की बहुत गुंजाईश है। उसका पूरा लाभ उठाएँ । बच्चों को भी भाषा का पूरा आनंद लेने के लिए प्रेरित करें।NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-Jahan chah wahan raah

लघु प्रश्न 

प्रश्न 1 इला का पूरा नाम क्या है ?

उत्तर 2 इला का पूरा नाम इला सचानी है ।

प्रश्न 2 इला सचानी कहां रहती है।

उत्तर 2 इला सचानी गुजरात के सूरत जिले में रहती है।

प्रश्न 3 लेख में बच्चों के कौन से खेलों का जिक्र हुआ है?

उत्तर 3 पिटपिटी बजाना, गिट्टे खेलना, पिट्ठू, झुला झुलना, पकड़म-पकड़ाई , विष-अमृत और धप्पा आदि ।

प्रश्न 4 बच्चे झूले पर पेंगे लेते हुए क्या गाते थे ?

उत्तर 4    कच्चे नीम की निंबौरी

सावन जल्दी अईयो रे!

प्रश्न 5 इला अपने पैरों से कौन से काम कर लेती थीं?

उत्तर 5 दाल- भात खाना, बाल बनाना, फर्श बुहारना, कपड़े धोना, तरकारी काटना, तख्ती लिखना आदि ।

प्रश्न 6 इला पढ़ते हुए कौन सी कक्षा तक पहुँची?

उत्तर 6 इला पढ़ते हुए दसवीं कक्षा तक पहुँची।

प्रश्न 7 इला दसवीं की परीक्षा क्यों पास नहीं कर पाई ?

उत्तर 7 इला को यह मालूम न था की परीक्षा के लिए उसे अतिरिक्त समय और लिखने के लिए दूसरा व्यक्ति मिल सकता है। इसलिए वह दसवीं की परीक्षा पास नहीं कर पाई ।

प्रश्न 8 इला कौन सी कढ़ाई मैं माहिर थी?

उत्तर 8 इला काठियावाड़ी कशीदाकारी में माहिर थी।

प्रश्न 9 क्या इला की मेहनत रंग लाई?

उतर 9 हाँ, इला की मेहनत और हौंसले ने उसे माहिर कशीदाकार बना दिया।

प्रश्न 10 इला यह सब कैसे कर पाई?

उत्तर 10 इला ने जीवन में कभी हार नहीं मानी। मेहनत करती रही और असंभव को संभव बना दिया।

NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-जहाँ चाह वहाँ राह से प्रश्न-उत्तर 

प्रश्न 1 इला या इला जैसी कोई लड़की यदि तुम्हारी कक्षा में दाखिला लेती तो तुम्हारे मन में कौन-कौन से प्रश्न उठते?

उत्तर 1 इला या इला जैसी कोई लड़की मेरी कक्षा में प्रवेश लेती तो उसके बारे में कोई विशेष प्रश्न तो ना उठते ।लेकिन उसकी चुनौतियों के बारे में जरूर प्रश्न उठते। जैसे:-

पहले बच्चों से पूछें फिर आगे बढ़ें। उनके प्रश्नों को प्राथमिकता दें ।

1 उसे खाने, नहाने, कंघी करने, कपड़े पहनने मैं क्या मुश्किलें आती होंगी और वह उनसे कैसे निपटती होगी?

2 वह दूसरों से किस प्रकार की मदद चाहती होगी?

3 वह अपने और हमारे बारे में क्या सोचती होगी?

4 क्या वह खुद को हमसे अलग समझती होगी?

5 क्या वह मुझे अपना दोस्त बनाएगी?

6 क्या वह हमारे साथ पढ़ना-लिखना और खेलना पसंद करेगी?

7 मैं उसके लिए क्या कर पाऊंगी?

8 मुझे उसकी जरूरतों का कैसे पता चलेगा?

अंत में यह प्रश्न तो मेरे मन में जरूर आता कि वह हम जैसी क्यों नहीं है? क्या कहीं कोई चूक हुई है? क्या ऐसा होने से रोका जा सकता था? अब उसे ठीक करने के लिए क्या किया जा सकता है? आगे ऐसा किसी के साथ ना हो इसके लिए क्या करना चाहिए?

प्रश्न 2 इस लेख को पढ़ने के बाद क्या तुम्हारी सोच में कुछ बदलाव आए?

उत्तर 2 इस लेख को पढ़ने के बाद यह लगा कि कुछ भी नामुमकिन नहीं है। बस हिम्मत चाहिए। अगर कुदरत ने कुछ कमी रखी है तू जरूर कुछ खासियत भी दी होगी। उसे पहचानने की आवश्यकता है। इन विशेष लोगों को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। ये सब-कुछ कर सकते हैं। इला ने हाथों की कमी को पैरों से पूरा किया और कामयाब बनी। यह भी महसूस हुआ कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। मेहनत करने से हर चाहत पूरी की जा सकती है। जहाँ चाह वहाँ राह।

मैं भी कुछ कर सकती हूँ

यहाँ बच्चों से बातचीत से तय करें क्या-क्या उत्तर में शामिल किया जाये।

प्रश्न 1 यदि इला तुम्हारे विद्यालय में आए तो उसे किन-किन कामों में परेशानी आएगी?

उत्तर 1 यदि इला  हमारी पाठशाला में आएगी, तो उसे कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। परंतु उसकी मदद के लिए हम हमेशा मौजूद रहेंगे। इला के लिए चुनौतियाँ:-

1 अपना सामान खुद उठाना।

2 बेंच पर पढ़ते हुए पृष्ठ पलटना।

3 तेज गति से लिखना।

4 हमारे साथ सभी खेल खेलना।

5 दिन का भोजन खाना ।

6 पानी पीना।

7 दौड़ते हुए अपना बचाव करना।

8 पैरों को साफ रखना।

9 ऊँचाई पर रखी चीजें निकालना।

10 परीक्षा में लिखना।

11 अन्य बच्चों को गति से काम करते देख, खुद को सम्भालना।

प्रश्न 2 उसे यह परेशानी न हो इसके लिए अपने विद्यालय में क्या तुम कुछ बदलाव सुझा सकती हो?

उत्तर 2 इला को परेशानी ना हो इसके लिए छोटे-छोटे बदलाव करने होंगे। जैसे:-

1 इला का बैग पाठशाला में ही रखना।

2 इला को इस तरह से बिठाना ताकि वह अपने पाँव से काम कर सके।

3 उसे लिखने के लिए अधिक समय देना।

4 उसे मौखिक के साथ श्यामपट्ट से लिखने के मौके देना।

5 खेल के नियम इस तरह बदलना की इला खेल सके और उसे चोट भी न लगे।

6 खाना खाते समय बैठने की सही जगह देना।

7 पानी पीने के लिए ऐसा नल लगाना (ऊपर की ओर) जिससे पानी उसके मुंह में जा सके।

8 हम सब बच्चे ध्यान रखेंगे कि दौड़ते -खेलते उससे कोई टकराए न।

9 उसे सभी काम अपने पैरों से करने होंगे इसलिए उन्हें साफ करने और रखने की की व्यवस्था करना।

10 ज्यादातर चीजों को इला की पहुंच में रखना।

11 परीक्षा के समय अधिक समय देना। जरूरत होने पर दूसरे बच्चों से मदद पहुंचाना।

12 हम इला को यह महसूस नहीं होने देंगे कि वह पीछे छूट रही है।

अपनी पाठशाला के अनुसार इला की जगह खुद को रख कर सोचें कि और क्या बदलाव करने पड़ेंगे।

प्यारी इला

इला के बारे में पढ़कर जैसे भाव तुम्हारे मन में उठ रहे हैं उन्हें इला को चिट्ठी लिखकर बताओ। चिट्ठी की रूपरेखा नीचे दी गई है।

उत्तर

निकुंज

रा. प्रा. पा. ……………………..

गाँव/शहर ………., डाकघर …….

तहसील……….., जिला………

राज्य…….., पिन ………………

दिनांक ……………

प्रिय इला दीदी ,

दीदी मैं निशा, कक्षा पांचवी में पढ़ती हूँ। हिंदी की किताब में आपके बारे में पढ़ा। पढ़कर हैरान भी हूं और उत्साहित भी कि आपने कैसे अपनी कमजोरी को ताकत में बदल दिया। चुनौतियां तो आपको बहुत रही होंगी। आखिर आपने उन सब चुनौतियों को हरा ही दिया। सोच कर हैरान हूं आप कैसे बारीक सुई से कढ़ाई का काम कर लेती होंगी? कोई ना कोई नया उपाय तो आपने ढूंढा ही होगा। जब आप यह काम कर सकती हैं तो दैनिक काम करने तो आपको बिल्कुल भी मुश्किल नहीं लगते होंगे? मैं सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती हूं कि आप हर काम के लिए कोई ना कोई नया तरीका अपनाती होंगी। जिनके बारे में हम शायद सोचते भी नहीं है। शायद यही कारण है जो आप हमारी पाठ्यपुस्तक में हैं।

उम्मीद है कि मैं आपसे कभी मिल पाऊँगी। उस दिन मैं आपसे ढेर सारी बातें करूंगी। आप के बारे में पढ़ कर ही मुझे इतनी प्रेरणा मिली है तो आपसे मिलकर तो सच में बहुत अच्छा लगेगा। आपसे एक बात पूछनी है कि जब आपको छोटे-छोटे कामों में मुश्किलें आती थीं, उस समय आप क्या सोचती थीं? आप खुद को कैसे मजबूत रखती थी? कामयाब हो जाने पर अब आपको कैसा लगता है?

आपसे एक बात और कहनी है कि मैं भी जीवन में कभी हार नहीं मानूँगी। आपके जैसे हर मुश्किल के लिए कोई न कोई हल ढूंढ ही लूंगी। आपके बारे में पढ़कर बहुत हौंसला मिला है। इसे हमेशा बनाए रखूंगी। समय लगे तो मुझे पत्र जरूर लिखना। बाकी मिलने पर।

आपकी छोटी बहन

निशा

अधिक जानकारी के लिए सन्दर्भ :- हिंदी में पत्र लेखन

सवाल हमारे, जवाब तुम्हारे

प्रशन 1. इला को लेकर स्कूल वाले चिंतित क्यों थे? क्या उनका चिंता करना सही था या नहीं? अपने उत्तर का कारण लिखो।

उत्तर 2   इला का स्कूल उसकी सुरक्षा और काम करने की गति को लेकर चिंतित था। उनका चिंता करना कुछ हद तक ठीक था क्योंकि वे तब तक इला के हौंसले से परिचित नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि अपनी सुरक्षा के लिए वह हाथों का प्रयोग नहीं कर पाएगी। उसे हमेशा एक सहायक की आवश्यकता रहेगी। वे सोच रही थी कि क्या वह बच्चों के साथ घुल-मिल पायेगी? अन्य बच्चों के बीच काम करते हुए कहीं वह खुद को पिछड़ा हुआ तो महसूस नहीं करेगी? लेकिन मुझे लगता है बहुत चिंता नहीं चुनौती का विषय थी।

प्रश्न 2 इला की कशीदाकारी में खास बात क्या थी?

उत्तर 2 इला काठियावाड़ी कशीदाकारी में माहिर थीं। उन्होंने काठियावाड़ी कशीदाकारी के साथ नए टांको का इस्तेमाल किया। पत्तियों में चिकनकारी शुरू की और डंडियों को कांथा से सुंदर बनाया। उन्होंने लखनऊ और बंगाल की कढ़ाई के तरीकों का भी प्रयोग किया। इस तरह पुराने कढ़ाई के तरीकों मे नयापन भर दिया। जिस कारण उनके काम को सभी ने पसंद किया और उन्हें बहुत प्रशंसा मिली।

प्रश्न 3 सही के आगे () का निशान लगाओ।

इला दसवीं की परीक्षा पास नहीं कर सकी, क्योंकि …

-परीक्षा के लिए उसने अच्छी तरह तैयारी नहीं की थी।

-वह परीक्षा पास करना नहीं चाहती थी।

-लिखने की गति धीमी होने के कारण वह प्रश्न-पत्र पूरे नहीं कर पाती थी।

-उसको पढ़ाई करना कभी अच्छा लगा ही नहीं।

उत्तर 3 लिखने की गति धीमी होने के कारण वह प्रश्न-पत्र पूरे नहीं कर पाती थी।

प्रश्न 4 क्या इला अपने पैर के अँगूठे से कुछ भी करना सीख पाती, अगर उसके आस-पास के लोग उसके लिए सभी काम स्वयं कर देते और उसको कुछ करने का मौका नहीं देते?

उत्तर 4 यदि इला के आस-पास के लोग उनके सभी काम कर देते तो उन्हें काम करने की जरूरत ही न लगती। अपनी हर इच्छा के लिए सदैव दूसरों पर निर्भर रहतीं। वे कशीदाकारी करना तो दूर, उसके बारे में सोचती भी न। उन्हें यह काम असंभव लगता। और उनके बारे में हम इस प्रकार कभी ना पढ़ते।

कशीदाकारी NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-जहाँ चाह वहाँ राह पाठ से। 

प्रश्न 1 (क) इस पाठ में सिलाई-कढ़ाई से संबंधित कई शब्द आए हैं। उनकी सूची बनाओ। अब देखो कि इस पाठ को पढ़कर तुमने कितने नए शब्द सीखे।

उत्तर 1 (क) पाठ में सिलाई-कढ़ाई से संबंधित कई शब्द आए हैं। जैसे:- सुई-धागा, मलमल, रेशम, पल्लू, कसूती के टाँके, भरवाँ टाँके, कांथा, बेल-बूटे, बूटियाँ, काठियावाड़ी कशीदाकारी, चिकनकारी, कसूती और ज़ंजीर।

प्रश्न 1 (ख) नीचे दी गई सूची में से किन्हीं दो से संबंधित शब्द (संज्ञा और क्रिया दोनों ही) इकट्ठा करो।

फुटबाल, बुनाई (ऊन), बागबानी, पतंगबाज़ी

उत्तर 1 (ख):

फुटबाल : संज्ञा- खेल, खिलाड़ी, मैदान, जाल, बॉल, पाला आदि।

क्रिया- खेलना, दौड़ना, मारना, अभ्यास, उछालना, फेंकना आदि।

बुनाई: संज्ञा- ऊन, धागा, सूई, फंदे, घर, बुनती, गोला आदि।

क्रिया- लपेटना, बुनना, उधेड़ना, पिरोना, सिलना, आदि।

पतंगबाजी: संज्ञा- कागज़, तीलियाँ, मांझा, पतंग, चर्खी, आदि।

क्रिया- उड़ाना, खींचना, ढील देना, भागना, कन्नी काटना आदि।

बागबानी : संज्ञा- मिट्टी, खुरपा, बीज, पानी, खाद, पौधा, अनाज़, दालें, तिलहन, आदि।

क्रिया- जुताई, रोपाई, सिंचाई, निराई, गुड़ाई, कटाई, छंटाई।

प्रश्न 2. एक सादा रुमाल लो या कपड़ा काटकर बनाओ। उस पर नीचे दिए गए टाँको में से किसी एक टाँके का इस्तेमाल करते हुए बड़ों की मदद से कढ़ाई करो ।

उत्तर-  समय अनुसार या बिना बैग के दिन (Bag-less day) यह कार्य किया जा सकता है। इस कार्य में अध्यापक, माता-पिता का सहयोग ले सकते हैं। जिन्हें कशीदाकारी का कार्य करना आता है, उन्हें स्कूल बुलाया जा सकता है। उनकी देखरेख में बच्चों से यह कार्य करवाना अधिक लाभदायक हो सकता है। सीख जाने के पश्चात यह कार्य असाइनमेंट के रूप में बच्चों को दिया जा सकता है। सभी बच्चों द्वारा किया गया कार्य पाठशाला में प्रदर्शित करना भी प्रेरणादाई होगा।

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NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 5-जहाँ चाह वहाँ राह (Jahan chah wahan raah) यह सामग्री सिर्फ संदर्भ के लिए है। आप अपने  अनुसार प्रयोग करें।विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है । पुस्तक में चर्चा की बहुत गुंजाईश है। उसका पूरा लाभ उठाएँ । बच्चों को भी भाषा का पूरा आनंद लेने के लिए प्रेरित करें। यह सामग्री केवल सहायक के रूप में है। यह अंतिम नहीं। इसके आलावा बहुत कुछ किया जा सकता है।


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