NCERT Solutions Class 5th EVS Chapter-6 बूँद-बूँद दरिया-दरिया

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अध्याय 6 बूँद-बूँद, दरिया-दरिया

lesson-6 Boond Boond, Dariya Dariya

कक्षा 5 पर्यावरण अध्ययन | आस-पास

NCERT Solutions Class 5th EVS Chapter-6 बूँद-बूँद दरिया-दरिया (Boond Boond, Dariya Dariya) (CBSE) यह सामग्री संदर्भ के लिए है। आप अपने विवेक से प्रयोग करें। अध्याय में विद्यार्थी के अनुसार बदलाव जरूरी है। पुस्तकों में  चर्चा के लिए बहुत स्थान हैं। उनका प्रयोग अवश्य करें । यह उद्देश्य भी है। सिर्फ  लिखना पर्यावरण को समझने-समझाने का सही तरीका नहीं हो सकता। 

NCERT Solutions Class 5th EVS Chapter-6 बूँद-बूँद दरिया-दरिया (Boond Boond, Dariya Dariya)

अध्याय के मध्य गतिविधियाँ

प्रश्न 1.अपने स्कूल के आस-पास के इलाके को देखो। क्या वहाँ कच्चा मैदान, पक्की सीमेंट से बनी सड़कें, नालियाँ, आदि हैं। इलाका किस तरह का है? जैसे-ढलानवाला, पथरीला या किसी और तरह का। तुम्हें क्या लगता है, बारिश का पानी बहकर, कहाँ-कहाँ जाता होगा? जैसे-जमीन में, नालियों में, पाइपों में, गड्डों में, आदि।

उत्तर 1 मेरे स्कूल के आस-पास कोलतार और सीमेंट से बनी पक्की सड़कें हैं। वह इलाका ढलानदार और पथरीला है। बारिश का कुछ  पानी रिसकर जमीन में चला जाता है और अधिकांश पानी नालियों और नालों से बहकर नदियों में चला जाता है।

चर्चा करें

शिक्षक संकेत (गतिविधि)

बच्चों को बताएं कि अल-बिरूनी की किताब किस तरह से इतिहास के बारे में जानने में मददगार है ऐसे ही अन्य इतिहास के स्त्रोत, जैसे-इमारतें, दस्तावेज़, सिक्के, चित्र, आदि के बारे में चर्चा करें उज्बेकिस्तान को संसार के नक्शे में ढूंढने में बचों को मदद करें

उत्तर अल-बिरूनी हज़ार से भी अधिक साल पहले भारत आए थे। उन्होंने भारत में जो महत्वपूर्ण और रोचक देखा उसके बारे में अपनी किताब में लिखा। अब वे तो इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी किताब आज भी उपलब्ध है। जिससे हम उस समय के भारत के बारे में जान सकते हैं। अगर वे न लिखते तो शायद बेहतर तरीके से उस समय की जानकारियां हम तक न पहुँचती। इस प्रकार उनकी पुस्तक ने हमारी मदद की।  

पुस्तक की ही भांति पुरानी इमारतें, दस्तावेज़, सिक्के, चित्र, भी हमें समय में पीछे जाने और उसे समझने का अवसर देते हैं।

दस्तावेज़-  दस्तावेज़ लिखित होते हैं। उन्हें पढ़ कर बीते समय के बारे में जान सकते हैं। उस समय के समाज और उनके रहन-सहन और भाषा विकास को जान पाते हैं।  

चित्र- पुराने चित्रों और मूर्तियों को देख कर उस समय की कला के विकास को जान सकते हैं।    

इमारतें- इमारतों की बनावट, सामग्री, निर्माण के तरीके से उस समय के विकास को समझा जा सकता है।  

सिक्के- पुराने सिक्कों से उस समय के व्यापार, लेन-देन के तरीकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  

उपरोक्त सभी जानकारियां यह समझने-समझाने में मदद करती हैं कि तब से अब तक क्या परिवर्तन हुए हैं? परिवर्तन कितनी देर में हुए हैं? इससे हम भविष्य में परिवर्तन कैसे होंगें, और कितने समय में हो सकते हैं, यह अंदाजा लगा सकते हैं। इसलिए इन सभी चीज़ों को सम्भालना और समझना जरूरी होता है।    

शिक्षक संकेत (गतिविधि) NCERT Solutions Class 5th EVS Chapter-6 बूँद-बूँद, दरिया-दरिया (Boond Boond, Dariya Dariya)

प्रश्न . जमीन, पानी किस तरह सोख लेती है। कुँए या बाँवड़ी में पानी कैसे पहुँच पाता है? चर्चा करें 

उत्तर ज़मीन में बहुत परतें होती हैं। सबसे ऊपर की परत पानी को सोख लेती है। फिर यह पानी परतों में रिसता हुआ गहराई तक चला जाता है। इसी प्रक्रिया को हम जमीन द्वारा पानी सोखना कहते हैं।

यह रिसा हुआ पानी ज़मीन के अंदर चट्टानों में इकट्ठा हो जाता है।  इसे भुमिगत जल भी कहते हैं। यही भुमिगत जल भूमि के अंदर ही अंदर कुँए या बाँवड़ी में पहुँच जाता है।

अध्याय के मध्य गतिविधियाँ

प्रश्न 1 क्या तुम्हारे यहाँ कभी पानी की किल्लत हुई है? अगर हुई है, तो उसका कारण क्या था?

उत्तर 1 हाँ, मेरे यहाँ कई बार गर्मियों में पानी की किल्लत हो जाती है। यह कमी नदी में पानी के कम हो जाने के कारण होती है । कई बार बिजली न होने के कारण, या जल विभाग की मोटर या पम्प में तकनीकी खराबी के कारण भी पानी की किल्लत हो जाती है।

प्रश्न 2 अपनी दादी, नानी या किसी और बड़ी से बातचीत करो कि जब वे तुम्हारी उम्र की थीं, तब-
(क) घर में पानी कहाँ से आता था? क्या तब और अब में कोई बदलाव हुआ है?

उत्तर क) उस समय पानी दूर नदी, तालाब, कुआँ, या बाँवड़ी से लाना पड़ता था। अब पानी जल विभाग द्वारा लगाए गए नल से घर-घर आता है।

(ख) मुसाफिरों के लिए पानी का किस-किस तरह का इंतजाम होता था? जैसे प्याउ, मशक या कुछ और? आजकल सफर में लोग क्या करते हैं?

उत्तर: उस समय मुसाफिरों के लिए प्याऊ का इंतजाम रहता था। वो भी बिलकुल मुफ्त। गाँव के लोग बारी-बारी रोज़ उसमें पानी भरते थे। कुछ लोग मशक में पानी भरकर भी चलते थे।

आजकल तो पानी बोतलों में बिकने लगा है।  सफर में लोग बोतलों में पानी ले कर चलते हैं या दूकान से खरीद लेते हैं।

पता करो

प्रश्न1 क्या तुम्हारे घर या स्कूल के आस-पास तालाब, कुआँ या बाँवड़ी  बनी है? उसे देखने जाओ और पता भी करो।
प्रश्न1 क). यह कितना पुराना है? किसने बनवाया होगा?

उत्तर1 क) हाँ, मेरे घर के पास एक बहुत पुरानी बाँवड़ी है। कुछ लोग कहते हैं कि यह सैंकड़ों साल पुरानी है। यह यहाँ के लोगों ने मिलकर बनाई थी।

प्रश्न1 ख) इसके आस-पास किस तरह की इमारत बनी है?

उत्तर1 ख) इसके आस-पास कोई भी इमारत नहीं बनी है।

प्रश्न1 ग) पानी साफ है या नहीं? क्या इसकी सफाई होती है?

उत्तर1 ग) पानी साफ है। इसकी सफाई गाँव के लोग समय-समय पर मिलकर करते हैं ।

प्रश्न1 घ) यहाँ से कौन-कौन पानी भरता है?

उत्तर1 घ) यहाँ से गाँव के लोग और मुसाफिर पानी भरते हैं।

प्रश्न1 ड) क्या कभी यहाँ कोई त्योहार मनाया जाता है?

उत्तर1 ड) हाँ, हर वर्ष बैशाख संक्रांति को गाँव के लोग मिलकर जल देवता की पूजा करते हैं। विवाह होने पर नए दूल्हा-दुल्हन यहाँ पूजा करने आते हैं।

प्रश्न1 च) पानी कहीं सूख तो नहीं गया?

उत्तर1 च) नहीं, पानी सूखा तो नहीं है, लेकिन कम जरूर होने लगा है।

चर्चा करो

प्रश्न1 पुनीता के मोहल्ले में दो पुराने कुँए हैं। उसकी दादी बताती हैं कि लगभग 15-20 साल पहले तक उसमें पानी था। क्या कुँए सूखने की कुछ वजह ये हो सकती हैं? चर्चा करो

  1. कई जगह मोटर लगाकर जमीन का पानी निकाला जा रहा है।
  2. तालाब जिनमें बारिश का पानी इकट्ठा होता था, अब नहीं रहे।
  3. पेड़ों के आस-पास और पार्क मे भी जमीन को सीमेंट से पक्का कर दिया गया है।
  4. क्या तुम कोई और वजह भी सुझा सकते हो?

उत्तर1  इन सभी के अलावा और भी कई कारण हैं; जैसे—पेड़ों का बहुत ज्यादा कटना, जंगलों में आग लगना, जल स्त्रोतों की सही से देखरेख न करना, जल संरक्षण के सही तरीके न अपनाना। हाँ, एक कारण यह भी हो सकता है कि सबके घरों में नल से पानी आता होगा। अब वे कुँए की सुध ही नहीं ले रहे होंगे।

हाल की बात  बूँद-बूँद, दरिया-दरिया 

प्रश्न 1 आज लोग पानी का इंतजाम किस-किस तरह से करते हैं। चित्र को देखकर चर्चा करो।

उत्तर1 आज लोग पानी का इंतजाम निम्न तरीकों से करते हैं।

(क) हैंड पम्प से

(ख) पम्प या मोटर के द्वारा

(ग) जल-विभाग के नल द्वारा।

(घ) जल-विभाग के टैंकरों से

(च) नहर या नदी से

प्रश्न 2. तुम्हारे यहाँ जिस तरह पानी आता है उस पर () निशान लगाओ। अगर किसी अलग तरीके से आता है तो अलग से कॉपी में लिखो?

उत्तर 2 हमारे घर में पानी जल विभाग द्वारा लगे नल से आता है। जरूरत पड़ने पर बाँवड़ी से भी लाते हैं। कई बार तो टैंकर से लाना पड़ता है।

चर्चा करो

शिक्षक संकेत 

प्रश्न1 पानी की सुविधा सभी को बराबर नहीं मिलती- इस पर चर्चा जरूरी है साथ ही यह भी  देखें की कहाँ-कहाँ से और किन परेशानियों से लोगो को पानी लाना पड़ता है? पानी और जात-पात का मुद्दा मुश्किल तो है लेकिन जरूरी भी है ।

चर्चा अपने आस-पास से शुरु करें। लोग कैसे पानी के लिए परेशान है?

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उत्तर1  कुछ लोग पहुँच के कारण पानी ज्यादा भरते हैं कुछ का गुजरा भी मुश्किल है। घुमंतू लोगो को कोई अपने यहाँ पानी नहीं भरने देता। जरूरत तो उनको भी है। पानी कम होने पर लोगों को दूर-दूर से पानी भरना पड़ता है। बच्चे भी इसी काम में मदद करते हैं इसलिए स्कूल का नुकसान हो जाता है। घर के कई सदस्य अपने काम पर नहीं जा पाते क्योंकि पानी ढोना होता है।

उपर से ये जात-पात। पानी होते हुए भी कुछ लोगों को पानी के लिए तड़पना पड़ता है। इससे नुक्सान किसी एक का नहीं बल्कि पुरे समाज का होता है। आपसी समझ खो जाती है और प्रेम भाव कम हो जाता है। इसे रोकना हमारा कर्तव्य है।

प्रश्न 1. जिंदगी का हक तो सभी का है। फिर जीने के लिए या पीने भर के लिए पानी मिल जाएक्या यह हर एक को मिल रहा है? ऐसा क्यों है कि कुछ लोगों को तो खरीदकर ही पानी पीना पड़ता है? पृथ्वी पर तो पानी सभी का है, साँझा है। कुछ लोग गहरा बोरिंग करके जमीन के नीचे से ज्यादा पानी खींच लेते हैंयह कहाँ तक सही है? तुमने क्या ऐसा कहीं देखा है? कुछ लोगों को जल बोर्ड के पाइप में टुल्लु पंप क्यों लगाना पड़ रहा होगा? इससे दूसरे लोगों को परेशानी हो रही होगी? तुम्हारा क्या कुछ ऐसा अनुभव है?

उत्तर1 हाँ, पीने का पानी सभी को मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। कुछ लोगों को पानी खरीद कर पीना पड़ता है, क्योंकि दूसरे लोग उनको पानी मिलने ही नहीं देते। किसी न किसी तरह से ज्यादा पानी भर लेते हैं। कुछ धनी आदमी बोरिंग करके ज्यादा गहरे से पानी निकाल लेते हैं। जिससे आस-पास के जल स्त्रोत सुख जाते हैं। कुछ स्वार्थी लोग अपने मतलब के लिए जल बोर्ड की पाइप में टुल्लु पंप लगाते हैं और जरूरत से ज्यादा पानी खींच लेते हैं। मेरे मुहल्ले में कई लोग ऐसा करते हैं। इससे दूसरों को बहुत परेशानी होती है। यह तो सरासर गलत है।

बिल को देख कर बताओ

प्रश्न1 यह बिल कौन-से दफ्तर से आया है?

उत्तर1 यह बिल दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर से आया है।

प्रश्न2 तुम्हारे यहाँ अगर बिल आता है तो कहाँ से आता है?

उत्तर2 हाँ, मेरे यहाँ भी यह बिल आता है। यह बिल जल विभाग के दफ्तर से आता है।

प्रश्न3 इस बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे दिल्ली सरकार क्यों लिखा होता है?

उत्तर3 इस बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे दिल्ली सरकार इसलिए लिखा होता है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड दिल्ली सरकार का विभाग है।

प्रश्न4 बिल किसके नाम से है? कितने महीनों के कितने पैसे देने पड़ रहे हैं?

उत्तर4 बिल मो. उमर और मो. शोएब के नाम से हैं। दो महीनों के 350 रु. देने पड़ रहे हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि  एक महीने के 175 रु. देने हैं।

प्रश्न5 क्या तुम्हारे यहाँ पानी के पैसे चुकाने पड़ते हैं? क्या तुम्हारे यहाँ अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग है? बड़ों से पता करो।

उत्तर5 हाँ, मेरे यहाँ पानी के दाम चुकाने पड़ते हैं। अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग-अलग है। ग्रामीण इलाके में कम तथा शहरी इलाके में ज्यादा मूल्य देना होता है।

प्रश्न6 तुमने इस तरह की क्या कोई खबर पढ़ी है? लोगों ने मिल कर पानी की परेशानी को कैसे दूर किया? क्या किसी पुराने तालाब या बावडी को फिर ठीक करके इस्तेमाल किया?

उत्तर6 हाँ, मैंने इस तरह की खबर पढ़ी है। महाराष्ट्र के एक गाँव में लोगों ने एक पुराने तालाब को साफ करके उसमें पानी भर कर परेशानी को दूर किया था। उनकी खबर टीवी पर भी दिखाई गयी थी। लोग बहुत खुश थे।

हम क्या समझे

प्रश्न1 पोस्टर बनाओ-पृथ्वी पर पानी सभी का है, साझा है।कुछ और ऐसे ही नारे सोचो और साथ ही चित्र भी बनाकर अपना एक सुन्दर पोस्टर बनाओ।

नोट:- बच्चे अपनी मर्ज़ी से सोच कर पोस्टर बनाए।

प्रश्न2 एक पानी का बिल लाओ उसे देखकर बताओ-
1. यह बिल किस तारीख तक का है?

 उत्तर: यह बिल 7 जनवरी तक का है।

2. इस बिल के लिए कितने पैसे भरने पड़ेंगे?

उत्तर: इस बिल के पचास रु. भरने पड़ेंगे।

3. इनके अलावा बिल में और क्या-क्या देख पा रहे हो?

उत्तर: इस बिल में 35.00 रु. का शुल्क मुरम्मत के लिए लगाया गया है।

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