Time table for primary classes What? How?

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प्राथमिक कक्षाओं हेतु समय-सारणी क्या? कैसे?

Time table for primary classes what? How?

 

Time table for primary classes What? How?

सारांश 

Time table for primary classes what? How? लेख में नमूना/उदाहरण के लिए समय सारणी  अंतिम हिस्से में संलग्न है। यह समय सारणी  किसी शोध का परिणाम नहीं है यह मात्र सन्दर्भ हेतु है जिसका प्रयोग आप अपनी समय सारणी के निर्माण में सन्दर्भ के रूप में कर सकता है। इस लेख में समय सारणी निर्माण के मुख्य बिंदूओं पर चर्चा की गई है। आप सोच विचार कर अपने स्कूल की प्राथमिकताओं के अनुसार समय सारणी बना सकते है।

समय-सारणी

समय-सारणी एक लचीला एवम् विस्तृत समय नियोजन है। यह प्रत्येक विषय एवम गतिविधि को आबंटित समय और क्रम दर्शाता है। यह पाठशाला के सुचारू संचालन को सम्भव बनाता है। पाठशाला की सफलता सही समय-सारणी निर्माण एवम् अनुपालना पर निर्भर करती है।

एक ऐसी समय-सारणी का निर्माण करना जो सर्वमान्य हो कठिन कार्य है। परन्तु इसका निर्माण आधारभूत मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। समय, स्थिति, स्थान एवम् उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप इसका परिवर्तनशील होना अनिवार्य गुण है।

आवश्यकता

  1. पाठशाला की दैनिक कार्यवाही एवम् गतिविधियों का नियमन करता है।
  2. एक निर्धारित क्रम से पाठशाला का संचालन सम्भव बनता है।
  3. समय और उर्जा की बचत होती है।
  4. बाल-केन्द्रित शिक्षण शैली की अनुपालना करते हुए दोहराव को रोकता है।
  5. कार्य का उचित विभाजन सम्भव होता है। जिससे पाठशाला प्रबंधन में सरलता आती है।
  6. विभागीय नियमों की अनुपालना करना सरल हो जाता है।
  7. पाठशाला में अनुशासन स्वत: ही उत्पन हो जाता है।

समय-सारणी के प्रकार

समय-सारणी गतिशील उपकरण है जो पाठशाला की  दिनचर्या को वैज्ञानिक तरीके से संचालित करने में अध्यापक को सहयोग प्रदान करती है।  इसका निर्माण विभिन्न प्रकार से किया जा सकता है। मुख्यतः यह तीन प्रकार का होता है :

  1. कक्षा समय-सारणी
  2. अध्यापक समय-सारणी
  3. मुख्य समय-सारणी

प्राथमिक-पाठशालाओं में समय-सारणी

प्राथमिक कक्षाओं में अधिकतर प्रतिदिन  2 अध्यापक, 20 विषय और 6 घंटे उपलब्ध हैं। सभी गतिविधियां इन्हीं निर्धारकों के आस पास घूमती हैं। यहाँ समय-सारणी का निर्धारण कई मनोवैज्ञानिक एवम् उपलब्ध मानवीय और भौतिक संसाधनों पर निर्भर करती है। यह ध्यान रखना आवश्यक होता है कि प्रतिदिन प्रत्येक विषय को उचित समय मिले। कोई विषय छुट न जाये। बहुकक्षीय शिक्षण में यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए विषयवार समय अवधि का निर्धारण करना एक ऐसा कार्य है जिसके लिए प्रत्येक शिक्षाकर्मी का अपना मत है। उस मत के पीछे कुछ अनुभव, समझ और  भ्रांतियां है। कुछ लोग लम्बे समय अंतराल को अधिमान देते हैं। कुछ  बच्चों की रूचिनुसार समय को निर्धारित ही नहीं करना चाहते। कुछ व्यक्ति 30-35 मिनट के समय अंतराल को उचित मानते हैं। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जानना जरूरी है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  1. विद्यार्थी कितनी देर तक ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं?
  2. विद्यार्थियों की एक स्थान पर बैठने की क्षमता।
  3. सभी विषय अनिवार्य है। सभी को उचित समय मिलना चाहिए।
  4. एक समय अंतराल को लम्बा रखना या दो पीरियड अलग-अलग समय पर रखना उचित है।
  5. बच्चों की पसंद का विषय लम्बे समय तक पढ़ाया जाये तो क्या अभिरुची हमेशा बनी रहेगी।
  6. बच्चें कम पसंद विषय में क्या लम्बे समय तक स्वय को व्यस्त रख पाएंगे?
  7. क्या छोटा पीरियड उन्हें विविधता उपलब्ध नहीं करवाएगा?
  8. क्या लम्बा पीरियड अध्यापक एवम् बच्चों के लिए सुविधाजनक है?
  9. लम्बे पीरियड में विविधता से क्या मानसिक थकावट को रोका जा सकता है?
  10. प्राथमिक कक्षाओं में लेखन गति कम होती है।क्या छोटे पीरियड में काम करवाना सम्भव है?

समय-सारणी निर्धारण के सिद्धांत

समय सारणी निर्धारण के लिए कुछ मूलभूत सिद्धांतों का ध्यान रखना आवश्यक है। ये सिद्धांत समय के अनुसार अनुभव एवम् शैक्षिक अनुसंधानों के परिणाम स्वरूप निर्मित हुए हैं। बतौर अध्यापक पसंद और अनुभव कैसी भी हों?  इनका ध्यान रखना लाभ पहुंचाता है।

  1.   समुदाय: जिस समुदाय के बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं, उनकी विशेषताओं का ध्यान रखना पाठशाला के लिए लाभदायक होता है।
  2.  पाठशाला का प्रकार : प्राथमिक, उच्च, वरिष्ठ, ग्रामीण और शहरी  आदि कारकों का ध्यान रखना सही समय नियोजन और अनुपालना के लिए लाभदायक होता है।
  3. विभागीय नियम : शिक्षा विभाग के नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
  4. अध्यापको की उपलब्धता: यह एक कारक ऐसा है जिसे समय-सारणी  निर्धारण   में विशेष स्थान दिया जाता है। क्योंकि अध्यापकों की संख्या पाठशाला के समय नियोजन को प्रभावित करती है।
  5. न्याय का सिद्धांत: सभी अध्यापकों को समान कार्यभार, क्षमता के अनुसार कार्यभर, विद्यार्थियों की क्षमताओं का ध्यान रखना (बैठने, सुनने, ध्यान की क्षमता )
  6. थकावट के क्षण: किस पीरियड तक बच्चे शारीरिक एवम् मनोवैज्ञानिक तौर पर थकने लगते हैं का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इससे उनका ध्यान बंटने लगता है। अरुचि पैदा होने लगती है। सीखना उस गति  से नहीं होता। समय व्यर्थ होने लगता है।
  7. विविधता का सिद्धांत: बैठने के कमरे, सीट और तरीके में बदलाव रूचि को बनाये रखने में मदद करता है। न केवल विद्यार्थी बल्कि अध्यापक भी नयापन महसूस करता है। जितना सम्भव हो बदलाव करते रहना चाहिए। लगातार शिक्षण अध्यापक एवम् विद्यार्थियों दोनों के लिए नुक्सानदायक है। इसलिए सृजनात्मक कार्यों, खेल, और मनोरंजन की उपलब्धता रहनी चाहिए।  इससे कक्षा में नीरसता नहीं आती। एक ही विषय लम्बे समय तक पढ़ना- पढ़ाना भी नीरसता को उत्पन्न करता है। इसलिए  छोटा पीरियड लाभदायक होता है।
  8.  गतिशीलता का सिद्धांत: निर्मित समय-सारणी कठोर नहीं हो सकती। जिसमें परिवर्तन सम्भव न हो। इसका मानवीय संसाधनों  के अनुरूप गतिशील एवम् परिवर्तनशील होना अनिवार्य गुण है।
  9. कठिनाई और महत्व: कोई भी  विषय कठिन नहीं होता न ही कम और जयादा महत्व का होता है। परन्तु विद्यार्थियों की क्षमताओं और प्रतिभाओं  को देखते हुए कुछ विषय विशेष हो जाते हैं। इसलिए विशेष विषयों को पहले स्थान देना चाहिए। कुछ विषय  अधिक बौद्धिक गतिविधियों की मांग करते हैं। उनकी शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में थकावट महसूस होती है। इसलिए इनके पीरियड के बीच कुछ मनोरंजन और बदलाव के आवश्यकता रहती है। इसका ध्यान रखना जरूरी रहता है।   

 रोचक तथ्य

ऐसा माना जाता है कि मंगलवार और बुधवार सप्ताह में ऐसे दिन होते हैं, जिन दिनों ज्यादा कार्य किया जा सकता है । इसलिए इन दोनों दिनों में अपेक्षाकृत अधिक समय और प्रयास मांगने वाले विषयों पर कार्य करना उपयुक्त रहता है। 

नमूना समय सारणी कक्षा चतुर्थ एवम् पञ्चम

शीतकालीन पाठशालाएं 10:00 सुबह  से 04:00 शाम


Time table for primary classes What? How?

 

नोट:- समय सारणी में बच्चोँ की रुचिनुसार बदलाव सम्भव है. हर माह चौथा शनिवार बिना बैग का दिन होगा.

नमूना समय सारणी  प्रथम, द्वितीय और तृतीय

शीतकालीन पाठशालाएं समय 10:00 सुबह  से 04:00 शाम

Time table for primary classes What? How?

नोट:- समय सारणी में बच्चोँ की रुचिनुसार बदलाव सम्भव है. हर माह चौथा शनिवार बिना बैग का दिन होगा.

उपयोगी लेख:-NCERT Solutions 5th Hindi Chapter 4-नन्हा फ़नकार तथा

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नमूना समय सारणी  प्रथम, द्वितीय और तृतीय

ग्रीष्मकालीन पाठशालाएं समय 09:00 सुबह  से 03:00 शाम

Time table for primary classes

नमूना समय सारणी  प्रथम, द्वितीय और तृतीय

ग्रीष्मकालीन पाठशालाएं समय 09:00 सुबह  से 03:00 शाम

Time table for primary classes

Time table for primary classes what? How? लेख में नमूना/उदाहरण के लिए समय सारणी  अंतिम हिस्से में संलग्न है। यह समय सारणी  किसी शोध का परिणाम नहीं है यह मात्र सन्दर्भ हेतु है जिसका प्रयोग आप अपनी समय सारणी के निर्माण में सन्दर्भ के रूप में कर सकता है। इस लेख में समय सारणी निर्माण के मुख्य बिंदूओं पर चर्चा की गई है। आप सोच विचार कर अपने स्कूल की प्राथमिकताओं के अनुसार समय सारणी बना सकते है।

 Timetable for primary classes what? how?

Summary

Time table for primary classes what? How? –A sample timetable is attached at the end of the article. This timetable is only for reference. Which will be helpful in planning your school time. facts kept in mind have been briefly described in this article.  Please use it at your own discretion. You can construct a timetable according to your school requirements.

Timetable

The construction of a timetable is a time-consuming process. It shows the time and order allocated to each subject and activity. It makes possible the smooth operation of the school. The success of the school depends on the right timetable construction and compliance. constructing a valid timetable is a difficult task. Construction should be in line with basic psychological principles. Its essential quality is to be according to the time, situations, locations, and available resources.

Requirement

  1. Regulates the daily activities of the school.
  2. Operation of the school becomes possible through a prescribed order.
  3. Saves time and energy.
  4. Compliance with the child-centered learning style prevents duplication.
  5. Proper division of work is possible. This brings ease to school management.
  6. Compliance with departmental rules becomes simpler.
  7. Discipline in school begins automatically.

Types of timetables

A timetable is a dynamic tool. It supports the teacher. The school runs in a scientific manner. It can be constructed in a variety of ways. Mainly it is of three types:

  1. Class timetable
  2. Teacher Timetable
  3. Main timetable

Timetable in primary schools

In primary classes, there are 2 teachers, 20 subjects, and 6 hours available. All activities revolve around these same determinants. Here the construction of the timetable depends on many psychological variables, available human and physical resources. It is important to keep in mind that every subject has got proper time each day. No subject should be left out. This is a dynamic task in multi-grade education.

Every teacher has his own opinion about determining the subject-wise period of time for primary classes. There are some experience, understanding, and misconceptions behind that opinion. Some people prefer a longer time interval. Some people consider the time interval of 30-35 minutes appropriate. Here are some important facts to know:

  1. How long can the student concentrate?
  2. The ability of the students to sit in one place.
  3. All subjects are mandatory. Every subject should get the right time.
  4. Is it not good to have two periods at different times instead of a prolonged period.
  5. It is tough to sit for a long period.
  6. Will children sit for a long if not taking an interest.
  7. Does a short period not going to make them diversified?
  8. Will the teacher and children remain comfortable for a long period?
  9. Can mental exhaustion be prevented by diversity over a long period?
  10. Writing speed in primary classes is low. Is it possible to get work done in a short period?

General principles of time table

It is necessary to take care of some basic principles for determining the timetable. These principles have been evolved as a result of time and experience and academic researches.

  1. Community: It is beneficial for the school to take care of the characteristics of a community of children who are studying in school.
  2. Type of School: The type of school must be considered. I.e. primary, high, senior, rural, and urban. It will help in the right time planning and compliance.
  3. Departmental Rules: It is important to keep in mind the rules of the education department.
  4. The availability of teachers: This is one factor that is given a special place in the schedule. Because the number of teachers influences planning at school.
  5. The principle of justice: Keep in mind the capabilities of all the teachers. Their workload and ability must be considered.
  6. Moments of exhaustion: For what period, children should be tired of physiologically and psychologically. Because it starts distracting them. Distress starts to grow. Learning does not happen at that speed. Time seems to be in vain.
  7. The principle of diversity: Change of rooms, seats, and sitting ways helps in maintaining interest. Not only the students, but the teacher also feels newness. The changes should be made as much as possible. Continuous teaching is harmful to both teachers and students. Therefore, there should be the availability of creative tasks, sports, and entertainment. It does not cause frustration in the classroom. Studying the same subject for a long time or teaching also produces neurosis. Therefore, the short period is beneficial.
  8. Theory of dynamism: The timetable cannot be rigid. In which change are not possible. It is essential to be dynamic and flexible in accordance with human resources.
  9. Difficulty and Importance: No subject is difficult or easy. No subject is less or more important. But varied choices of students make it complex. That’s why some subjects become laborious. Demands a fresh and free mind. Keep them at the beginning. There must be some breaks to break the boredom. Therefore these factors must be kept in mind while planning.

Interesting fact:-Time table for primary classes

It is believed that on Tuesday and Wednesday more work can be done… Therefore it is appropriate to work on topics that require a relatively long time and effort.

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Time table for primary classes what? How?-The timetable presented is only available for reference. This timetable is available as a helpful tool for your time planning. You can construct timetables according to the needs of your schools.


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